वी. सी. आर. का नया नया दौर था, फाजिल्का के संजीव और राजा सिनेमा में कोई भी नयी मूवी करीब 𝟐 या 𝟑 महीने बाद ही आती थी | कोशिश हर मूवी देखने की सिनेमा में ही होती थी क्योंकि वीडियो कैसेट में फिल्म छोटी होती थी और बार बार मशहुरियों को फॉरवर्ड करना पड़ता था | इसी लिए विश लिस्ट बना कर रखनी पड़ती थी |ऑनलाइन तो कुछ था ही नहीं और सब कुछ ऑफलाइन खुद ही बनाना पड़ता था | पंजाब केसरी में शुक्रवार के शुक्रवार नयी फिल्मो की सूची आती थी और उसी छोटे से पोस्ट को काट कर किसी पुराणी डायरी में चिपका लेते थे |आज वही एक पुराणी डायरी मिली जिसमे मैंने 𝟏𝟗𝟖𝟗 और 𝟏𝟗𝟗𝟎 की कुछ फिल्मों की लिस्ट लगा के रखी थी | फुर्सत के समय यही सब इस शहर से जुडी हुई यादें देखते रहते है और सोचते है की ऑफलाइन की छोटी सी दुनिया कितनी ख़ूबसूरत थी |
Tuesday, April 21, 2020
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