Monday, August 15, 2022

Fazilka Badha Lake Revitilization - Inauguration - 14th August 2022 || 6 PM

ਉਹ ਇਤਿਹਾਸਕ ਪਲ ਜਿਸ ਦਾ ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਨੇ ਲਗਭਗ 30 ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਕੀਤਾ। ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਦੀ ਪਹਿਚਾਣ ਅਤੇ ਸਾਡੀ ਗੁਆਚੀ ਹੋਈ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿਰਾਸਤ ਬਾਧਾ ਝੀਲ ਸਾਡੇ ਵਿਧਾਇਕ ਸ. ਨਰਿੰਦਰ ਪਾਲ ਸਿੰਘ ਸਵਨਾ ਅਤੇ ਸਾਡੇ ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਡਾ: ਹਿਮਾਂਸ਼ੂ ਅਗਰਵਾਲ ਅਤੇ ਬਾਧਾ ਪਿੰਡ ਦੇ ਸਰਪੰਚ ਸ. ਗੁਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਦੇ ਯਤਨਾਂ ਸਦਕਾ ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਦੀ ਵਾਪਿਸ ਮਿਲਣ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਸੁਹਿਰਦ ਯਤਨਾਂ ਸਦਕਾ ਹੀ ਸੰਭਵ ਹੋ ਸਕਿਆ ਹੈ। ਤੁਸੀਂ ਸਾਰੇ ਦਿਲੋਂ ਵਧਾਈ ਦੇ ਹੱਕਦਾਰ ਹੋ। ਇਹ ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਦੀ ਮੌਜੂਦਾ ਅਤੇ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਕਦਮ ਹੈ ਅਤੇ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੇ 75ਵੇਂ ਸਾਲ 'ਚ ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਲਈ ਇਸ ਤੋਂ ਸੋਹਣਾ ਤੋਹਫਾ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦਾ।
#ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ  #BadhaLake #Fazilka

वह इतिहासिक पल जिसका फाजिल्का ने करीब 30 साल इंतज़ार किया | फाजिल्का की पहचान और हमारी खोई हुई पर्यावरण विरासत बाधा झील , हमारे विधायक स. नरेंद्र पाल सिंह सवना और हमरे डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल और बाधा गांव के सरपंच स. गुरमीत सिंह के प्रयासों से फाजिल्का को वापिस मिलने जा रही है और इन्हीके ईमानदार प्रयासों से यह संभव हो पाया | आप सभी तहदिल से बधाई के पात्र है | फाजिल्का की वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए यह एक एहम क़दम और आज़ादी के 75वे वर्ष में फाज़िलका के लिए इससे खूबसूरत तोहफ़ा कोई और नहीं हो सकता | 
#बाधा _झील #फाज़िलका 

30 साल बाद जीवित होगी बाधा झील, किया जाएगा पुनर्निर्माण

Publish Date: Sun, 14 Aug 2022 09:59 PM (IST)Updated Date: Sun, 14 Aug 2022 09:59 PM (IST)

मोहित गिल्होत्रा, फाजिल्का : इतिहास गवाह है कि दुनिया के बड़े-बड़े नगर, कस्बे, यहां तक कि गांव भी उस जगह पर बसाए गए, जहां पानी नजदीक होता है। फाजिल्का शहर की शुरुआत भी इसी पानी से हुई थी। 18वीं शताब्दी में अंग्रेजों के समय एक जगह को झील का रूप देकर इसके किनारे बंगला बसाया गया, जिस बंगले को बाद में फाजिल्का कहा जाने लगा। लेकिन समय के साथ-साथ फाजिल्का को नाम देने वाली यह झील लुप्त होती गई। इस झील का पानी सतलुज से जुड़ा हुआ था, जोकि धीरे धीरे दूर होता गया, जिसके बाद झील सूखती गई। लेकिन समय-समय की सरकारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और यह सूखते सूखते पुरी तरह से लुप्त हो गई, लेकिन आज तीन दशक बाद फाजिल्का को अपनी ऐतिहासिक धरोहर मिलने जा रही है। फाजिल्का के विधायक नरेंद्रपाल सिंह सवना व डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल ने रविवार देर शाम बाधा झील के छोटे हिस्से की शुरुआत की।

फाजिल्का की ऐतिहासिक बाधा झील की बात करें तो यह 18वीं शताब्दी में बनाई गई। इस झील के साथ सतलुज का पानी जुड़ा हुआ था, लेकिन 1960 में एक संधी के तहत इस झील को पानी देना बंद कर दिया गया, जिसके चलते यह बाधा झील सूखने लगी। इस झील के लिए लंबे समय तक संघर्ष करने वाले ग्रेजुएट वेलफेयर सोसायटी के सचिव इंजी. नवदीप असीजा ने बताया कि 1995 में इस झील के सूखने की शुरुआत हुई और 2006 में यहां आखिरी कमल खिला। इस झील की खासियत के रूप में पाए जाने वाले मोर भी यहां से लुप्त हो गए, जिसके चलते ना तो तब की सरकारों ने इस पर ध्यान दिया और ना ही लोगों ने। वर्ष 2015-16 में यहां कालोनी काट दी गई, जिसके चलते यहां लगाए गए पेड़ों को भी उखाड़ दिया गया, तब से लेकर अब तक वह कई बार प्रशासन के समक्ष मांग उठाते रहे हैं। लेकिन पिछले दिनों बाधा में प्लाटों को लेकर आई एक शिकायत के आधार पर की गई जांच के साथ इस झील के पुन: निर्माण के रास्ते भी खुल गए। प्रशासन ने यहां पंचायती जमीन पर फसल पैदा करने वाले किसानों को इस बार के लिए फसल काटने तक की इजाजत दी है, जिसके बाद यहां झील को बड़ा रूप दिया जाएगा। फिलहाल झील की शुरुआत अढ़ाई एकड़ से की जाएगी। इस मौके पर विधायक नरेंद्रपाल सिंह सवना ने कहा कि फाजिल्का की ऐतिहासिक धरोहर की यह मांग काफी लंबे समय थी, जिसका सपना आज शुरुआत के साथ साकार होता दिखाई दे रहा है। वह उम्मीद करते हैं कि जल्द ही इस झील की तस्वीर पहले की जैसी दिखाई दे। वहीं डीसी डा. हिमांशू अग्रवाल ने कहा कि यह प्रयास गांवों के लोगों के साथ ही मिलकर संभव हो सकता है। इसलिए गांव वासी इसमें पूर्ण सहयोग दें। उन्होंने कहा कि इसे केवल झील तक ही नहीं, बल्कि गांव के लोगों के रोजगार के लिए भी मौके पैदा करने के लिए प्लान तैयार किया जाएगा। ताकि यहां के लोगों को भी फायदा मिले। गांव के सरपंच ने पंचायत व गांव वासियों की ओर से हर संभव सहयोग का विश्वास दिलाया।

Badha Lake Fazilka Revitalization Project


Tuesday, August 9, 2022

Fazilka authorities orders revival of century-old Badha lake; cancels allotted plots on its land

Chandigarh News, Hindustan Times
Published on Aug 06, 2022 02:43 AM IST
By Gaurav Sagar Bhaskar, Ferozepur


The office of the ADC (development), Fazilka, revealed that during investigation last month by the then ADC, Sagar Setia, it was found that the 5-5 marla plots to 69 people were allotted arbitrarily and executed in an unlawful manner and as a result, they stand revoked

The Fazilka district authorities have cancelled the plots allotted by panchayat on the land of century-old Badha lake in Badha village and ordered to revive the water body within six months.
In response to an RTI application, the office of the additional deputy commissioner (development), Fazilka, revealed that during investigation last month by the then ADC, Sagar Setia, it was found that the 5-5 marla plots to 69 people were allotted arbitrarily and executed in an unlawful manner and as a result, they stand revoked.
"Within six months, the old Badha lake at the site must be revived under MNREGA and the allotment of plots be revoked," Setia had ordered before his posting as ADC, Ferozepur, few days back.
The orders were on Friday implemented by the Fazilka administration.
Navdeep Asija, secretary (GWAF), one of the torch bearers working to revive the lake, said that on the occasion of 11th Anand Utsav, an annual environment festival of Fazilka region organized by Graduates Welfare Association Fazilka, (GWAF), citizens of Fazilka will gather for bhoomi pooja to start the revival work of Old Badha Lake at Fazilka on August 11.
Manoj Tripathi, an advocate, said that due to unplanned development and by diverting the water, this lake dried up which affected the ecology of the area badly and has left many such smaller horseshoe lakes on its banks dry.
"The lake-bed is now listed as panchayat land in the local revenue department's documents and has been leased out for cultivation. The ground water level has gone down to 40 m below the level," he said.

Saturday, July 2, 2022

Fazilka admn comes up with project ‘Kitab’, launches three libraries to develop reading habit among children

July 1, 2022 in Chandigarh
The Fazilka district administration in southwest Punjab last week launched three state-of-the-art libraries with internet access as part of its unique project called 'Kitab' to provide students with a convenient environment for studies and help them prepare for competitive exams. The district sharing a border with Pakistan has traditionally been devoid of facilities such as libraries and high-speed internet and the new libraries, launched on National Reading Week, would address the shortfalls, the administration hopes.

Deputy commissioner Dr Himanshu Aggarwal said: "These libraries will provide wings to the dreams of youngsters preparing for competitive exams. So far more than 150 youths have registered online to become members of these libraries and other aspirants have also responded on the online portal overwhelmingly."

Rs 4.5 lakh has been spent on adding books alone in these libraries, said the district administration. Students can take membership at a monthly fee of Rs 200 which would provide them internet access as well.

Additional deputy commissioner (development) Sagar Setia, who with the help of the deputy commissioner, initiated the project said that the three libraries were launched at Red Cross Bhawan Fazilka, Azimgarh in Abohar by municipal corporation Abohar and Jhorar Khera village bordering Rajasthan by the rural development department.
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"Online registration membership of these libraries can be done and so far more than 260 youngsters have registered in just three days." At Fazilka, the already existing library has been renovated while in Abohar and Jhorar Khera new libraries were constructed. The libraries are open from 7.30 am-8 pm and as of now at all time slots, they are fully occupied by students," he said.

Aggarwal said: "We aim to impart knowledge through books and information technology. The initiative intends to create equity by giving equal opportunities to the destitute children and youth. It is envisaged to abridge the digital divide and it will create space for the people for lifelong self-education."

Two computers have been installed at Abohar and Jhorar Khera villages while three at Fazilka. Digital library facilities will be available at these portals and one can study through the Diksha portal or other portals for school curriculum as well, said authorities. "Many courses have gone online these days, hence we can assist students in completing their online courses in these libraries after getting a time slot allotted for the classes," said the deputy commissioner.

Neetu, a student of Jhorar Khera village said: "I enjoy studying in the library. The environment is good and I get better concentration to study and also to get additional information through available books."

Setia added that the literacy rate in this border district is 86 percent which is higher than the national average and 40 percent of the population in the district belongs to SC/ST category. Thousands of children were preparing for competitive exams but there was no place for them to sit and prepare for the exam.

Friday, June 24, 2022

Fazilka district gets 3 modern AC libraries

"फाज़िल" शब्द का अर्थ होता है एक निपुण, जानकार, गुणी, श्रेष्ठ, उत्कृष्ट और प्रख्यात व्यक्ति। फाजिल्का शहर का नाम इसी शब्द से पड़ा | नाम की तरह ज्ञान अर्जित करने की चेष्टा ने ही फाजिल्का में कई पुस्तकालयों की बुनियाद रक्खी | फाजिल्का की बुनियाद रखने वाले लोगो ने इसी नाम के अनुरूप फाजिल्का को कई स्कूल कॉलेज और पुस्तकालय दिए जिसमे फाजिल्का के लोग, शिक्षक, समाज सेवी या शहर के प्रबंधन को देखने वाले लोग शामिल थे | बात अगर आज़ादी से पहले की की जाये तो महान शिक्षाविद स्वामी केशवानंद ने 1911 में "वेदांत पुष्प वाटिका" नाम की श्री साधु आश्रम फाजिल्का में लाइब्रेरी की स्थापना की | फिर आहूजा परिवार की और से प्रताप बाग़ में एक लाइब्रेरी की स्थापना की गयी | 1940 में फाजिल्का में मुंशी राम लखपति जी ने डिग्री कॉलेज की स्थापना के साथ कॉलेज में एक बड़ी लाइब्रेरी की स्थापना की | 100 साल पहले बने फाजिल्का के संस्कृत कॉलेज की संस्कृत की लाइब्रेरी आज भी अपने उन पुरानी किताबों की जिल्दों से अपनी महान गाथा कह रही है | आजादी के बाद की बात की जाये तो आखिरी लाइब्रेरी डॉक्टर गोबिंद राम शर्मा जी के नाम से शुरू की गयी, जो की उनके परिवार और बेटियों की और से स्थापित की गयी |
आज शायद करीबन 82 वर्षा के बाद वह पहला दिन था जब फाजिल्का के दोनों युवा आईएएस अधिकारी डिप्टी कमिश्नर Himanshu Aggarwal और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर सागर सेतीया के प्रयासों से आज फाजिल्का जिले को तीन बहुत ही खूबसूरत पुस्तकालय "प्रोजेक्ट क़िताब" के तहत समर्पित किये गए | हमारे युवा विधायक नरेन्दर सवना और फाजिल्का के एसएसपी भूपिंदर जी ने मिलकर इन तीनों पुस्तकालयों को फाजिल्का को समर्पित किया | शिक्षा इस शहर के नाम में ही नहीं बल्कि फाज़िलका की बुनियाद में है, आइये इन ज्ञान के भंडारों का ज्यादा से ज्यादा ज्ञान अर्जित कर फायदा उठाये | सभी लोगो का जो इस महान प्रयास में में शामिल हैं उन सब का कोटि कोटि धन्यवाद

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Three cutting-edge air-conditioned libraries, set up through the district administration, have been inaugurated in Fazilka, including one at a village, on Thursday.

On June 15, HT had highlighted the negative circumstance of public libraries in Fazilka, which as soon as used to thrive with readers but are at the verge of closure because of continuous forget with the aid of the government no matter repeated requests from the body of workers and residents.

Deputy commissioner Himanshu Aggarwal, who had confident to solve the issue, on Thursday joined neighborhood MLA Narinder Pal Singh Sawna and senior superintendent of police Bhupinder Singh Sidhu to inaugurate three libraries underneath the undertaking "Kitab" to mark the 75th Azadi Ka Amrit Mahotsav.

These libraries have come up at the Red Cross workplace in Fazilka metropolis, at Jhhorar Khera village along the Punjab-Rajasthan border and in Abohar. "These libraries aren't only air-conditioned and digitised, however equipped with unfastened Wi-Fi facility for youngsters to allow them to discover the ocean of understanding with a click of the mouse," stated Aggarwal.

The deputy commissioner said that each fortnight, a senior official from the administration will visit every library to supply a motivational lecture to its individuals, specially the adolescents, besides providing them with career guidance.

"Daily newspapers and month-to-month aggressive journals except different modern day magazines are being supplied right here to give an extensive range of observable cloth. Anyone can grow to be a member with a subscription price of ₹ two hundred consistent with each month, at the same time as the needy may be given a complimentary membership," said Sagar Setia, ADC(D), Fazilka.

Tuesday, April 26, 2022

ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਦੀਆਂ ਲਾਲ ਮਿਰਚਾਂ ਤੇ ਟਮਾਟਰ ਦੇਸ਼ ਵਿਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਪਾਏਗਾ ਧੂੰਮਾਂ, ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਖਰੀਦ

ਯੈੱਸ ਪੰਜਾਬ
ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ, 25 ਅਪ੍ਰੈਲ, 2022:
ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੀਆਂ ਲਾਲ ਮਿਰਚਾਂ ਅਤੇ ਟਮਾਟਰ ਪ੍ਰੋਸੈਸਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੇਸ਼ ਵਿਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਧਾਕ ਜਮਾਉਣਗੇ। ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਨੂੰ ਉਤਸਾਹਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਜੂਸਿਜ਼ ਲਿਮਿਟਡ ਕਿਸਾਨਾਂ ਤੋਂ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਲਾਲ ਮਿਰਚਾਂ ਅਤੇ ਟਮਾਟਰ ਖਰੀਦੇਗਾ। ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਵੱਲੋਂ ਇਹ ਖਰੀਦ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਦੇ ਅਬੋਹਰ ਨੇੜੇ ਸਥਿਤ ਆਲਮਗੜ੍ਹ ਪਲਾਂਟ ਵਿਖੇ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ। ਇਹ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪਲਾਂਟ ਮੁਖੀ ਸ੍ਰੀ ਸ਼ੁਭਾਸ ਚੌਧਰੀ ਨੇ ਦਿੱਤੀ।

ਸ੍ਰੀ ਸ਼ੁਭਾਸ ਚੌਧਰੀ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਲਾਲ ਮਿਰਚਾਂ ਦੀ ਖਰੀਦ ਸਬੰਧੀ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਵੱਲੋਂ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨਾਲ ਕੰਟਰੈਕਟ ਫਾਰਮਿੰਗ ਤਹਿਤ ਠੇਕਾ ਖੇਤੀ ਵੀ ਕਰਵਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਵੱਲੋਂ 15000 ਕੁਇੰਟਲ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਲਾਲ ਮਿਰਚਾਂ ਅਤੇ 21000 ਕੁਇੰਟਲ ਟਮਾਟਰ ਖਰੀਦ ਕੀਤੇ ਜਾਣੇ ਹਨ।

ਸਹਾਇਕ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਸ੍ਰੀ ਅਮਿਤ ਕੰਬੋਜ਼ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸਾਲ 2022-23 ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਪਲਾਂਟ ਅਬੋਹਰ ਵਿੱਚ ਮਿਰਚਾਂ ਦੀ ਚਟਣੀ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਤਿਆਰ, ਟੈਪੀ ਅਤੇ ਡੰਡੀ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਬਿਮਾਰੀ ਰਹਿਤ ਕੌੜੀਆਂ ਲਾਲ ਮਿਰਚਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ।

ਮਿਰਚ ਦੀਆਂ ਲੋੜੀਂਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਸੀ ਐਜ਼-27, ਸੀ ਐਜ਼ 01 ਅਤੇ ਹੋਰ ਕੌੜੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਨੂੰ ਤਰਜੀਹ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ 18 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਸਮੇਤ ਡੰਡੀ ਅਤੇ ਟੋਪੀ ਪਹੁੰਚ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਸੀਤੋ ਗੁੰਨੋ/ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਪਲਾਂਟ ਅਬੋਹਰ ਵਿਖੇ ਖਰੀਦ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਅਤੇ 24 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬਿਨਾਂ ਡੰਡੀ ਅਤੇ ਟੋਪੀ ਪਹੁੰਚ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਪਲਾਂਟ ਅਬੋਹਰ ਵਿਖੇ ਖਰੀਦ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪੱਕੇ ਗੂੜ੍ਹੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਟਮਾਟਰ ਪਹੁੰਚ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੋ ਅਬੋਹਰ ਵਿਖੇ ਖਰੀਦ ਕਰੇਗੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਟਮਾਟਰ 5 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਪਹੁੰਚ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਖਰੀਦ ਕੀਤੇ ਜਾਣਗੇ।

ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਚਾਹਵਾਨ ਕਿਸਾਨ ਪਲਾਂਟ ਮੁਖੀ ਸ੍ਰੀ ਸੁਭਾਸ਼ ਚੌਧਰੀ 9816050544 ਅਤੇ ਸਹਾਇਕ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਸ੍ਰੀ ਅਮਿਤ ਕੰਬੋਜ਼ 9478562582 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰਕੇ ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਨ।

Friday, March 4, 2022

As three-day Indus Commission meeting concludes, Pakistan assures free flow of Fazilka drain into Sutlej river

Commission also discussed the exchange of hydrological and flood data

Tribune News Service
New Delhi, March 3
India has said that its on-going projects including Pakal Dul, Kiru and Lower Kalnai were fully compliant with the Indus Waters Treaty, signed between India and Pakistan in 1960.

India's submission came at the three-day meeting of the Permanent Indus Commission (PIC) composed of Indus Commissioners of India and Pakistan which concluded in Islamabad on Thursday.

The Commission also discussed the exchange of hydrological and flood data. Both sides discussed the issue of the Fazilka drain, and Pakistan assured that all necessary actions will continue to be taken to ensure the free flow of Fazilka drain into the river Sutlej.

The Indian delegation was led by PK Saxena, the Indian Commissioner for Indus Waters. Under the provisions of the Indus Waters Treaty signed between India and Pakistan in 1960, the two Commissioners are required to meet at least once every year, alternately in India and Pakistan. The last meeting of the Permanent Indus Commission (PIC) was held from March 23-24, 2021 in New Delhi.

"The meeting was held in a cordial manner. Both the Commissioners reaffirmed their commitment to interact more frequently in an attempt to resolve issues through bilateral discussions under the treaty. It was agreed to hold the next meeting in New Delhi on mutually convenient dates,'' stated a MEA statement.

Tuesday, January 18, 2022

फाज़िलका के कार फ़्री ज़ोन का सम्मान


15 जनवरी 2022 को विभिन्न क्षेत्रों के स्टार्टअप्स के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कई अहम बातों का जिक्र किया, जिसमे उन्होंने उद्यमियों को आने वाली शहरी योजना विकास की का जिक्र करते हुए शहरी स्थायी जीवन शैली में *कार-फ़्री ज़ोन* बनाने का जिक्र किया | यह फाज़िलका जैसे छोटे शहर के लिए सम्मान की बात है की फाज़िलका ने हिंदुस्तान का पहला कार फ्री ज़ोन होने का ग़ौरव 2008 में ही हासिल कर लिया था और जिसका श्रेय मुख्य वास्तुकार उस समय के नगर प्रधान श्री अनिल सेठी और समाज सेवी डाक्टर नवदीप असीजा को जाता है | प्रधान मंत्री की पूरी स्पीच आप इस पीएमओ की वेबसाइट के लिंक पर सुन व् देख सकते है |


Abstract from PM Speech;


Friends,Our rapid urbanization is also a big focus area. Today, work is happening on a large scale in developing our existing cities and building new cities. There is a lot to be done in urban planning. We have to create such ‘walk-to-work’ concepts and integrated industrial estates, where there are better arrangements for the workers. New possibilities are waiting for you in urban planning. For example, a group just mentioned the national cycling plan and car-free zones for big cities. This is very important to promote sustainable lifestyles in cities. You must be aware when I went to the COP-26 summit, I talked about the Mission LIFE and my concept of LIFE is Lifestyle for Environments (LIFE). I believe that we need to make people aware of the use of those things by using technology. For example, the P-3 movement is imperative today. P-3 movement, i.e., Pro-Planet-People! Unless we make people aware of the environment and make them soldiers in the fight against global warming, we cannot win this battle. Therefore, India is involving many countries in this Mission LIFE.


https://www.pmindia.gov.in/en/news_updates/pms-address-at-interacts-with-startups-from-various-sectors/?comment=disable



#CarFreeZone #Fazilka #UrbanPlanning #AnilSethi #NavdeepAsija #StartupIndia

Friday, July 23, 2021

आनंद महोत्सव से हरा-भरा बनेगा फाजिल्का

पंजाब भर में वैसे तो कई महोत्सव होतें होंगे लेकिन फाजिल्का में पिछले 10 साल से ऐसा आनंद महोत्सव चल रहा है जिसके तहत फाजिल्का शहर को लगातार हरा भरा बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

संस, फाजिल्का: पंजाब भर में वैसे तो कई महोत्सव होतें होंगे, लेकिन फाजिल्का में पिछले 10 साल से ऐसा आनंद महोत्सव चल रहा है जिसके तहत फाजिल्का शहर को लगातार हरा भरा बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इस महोत्सव के तहत सावन माह के दौरान पौधारोपण अभियान चलाया जाता है, जोकि इस बार 18 जुलाई को चलने जा रहा है।

इस महोत्सव को चलाने वाली ग्रेजुएट वेलफेयर सोसायटी अब तक फाजिल्का में 10 से 12 हजार पौधे लगा चुकी है, जिनमें से चार हजार के करीब पौधे बड़े होकर पेड़ बन चुके हैं। वहीं इस साल के आनंद महोत्सव को सोसायटी के संरक्षक एवं ऊर्जा पुरुष कहलाए जाने वाले भूपिंद्र सिंह को समíपत किया गया है। फाजिल्का शहर के वातावरण प्रतिशत की बात करें तो यह एक प्रतिशत से भी कम है। लगातार बढ़ रही आबादी और लगातार निर्माण किए जा रहे भवनों के चलते पेड़ो की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रेजुएट वेलफेयर सोसायटी की ओर से सैटेलाइट के माध्यम लिए गए आकड़ों के अनुसार फाजिल्का में तीन मीटर तक के लगभग 5055 पेड़ हैं, जबकि आबादी की बात की जाए तो 100 घरों के पीछे केवल 24 पेड़ हैं, जोकि अपने आप में ही चिंता का विषय है। पर्यावरण को बचाने के लिए हर घर के पीछे एक पौधा होना चाहिए, जिससे हमारा आसपास शुद्ध हो सके। फाजिल्का की ग्रेजुएड वेलफेयर सोसायटी हर साल महोत्सव का आयोजन करके इस तरह का प्रयास कर रही है।

Friday, May 21, 2021

Tribute to Professor Dinesh Mohan and Sunder Lal Bahuguna by Ravish Kumar - Prime Time -NDTV

भारत के सड़क सुरक्षा की पितामह और सच्चे देशभगत प्रोफेसर दिनेश मोहन नहीं रहे | देश के लिए और हम सब के लिए यह एक न पूरा होने वाला नुकसान है शायद | उनसे सं 2003 में एक अचानक हुए वाकय से जुड़ा | रांची से पटना गाड़ी में सफर करते हुए प्रोफेसर मोहन का आउटलुक में एक आर्टिकल पढ़ा, यह सं 2003 की बात है, जिसमे उन्होंने कहा की देश में एक भी सड़क शायद ऐसे नहीं जो सड़क सुऱक्षा के मापदंडो पर पूरी उतरे, और जिस गति से देश सड़को का बिना सड़क सुरक्षा के मापदंडो से विकास होने जा रहा है ,सड़क हादसों में मौतों की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी | तब में IIT में M.Tech कर रहा था | ईमेल की, सर आप ऐसे कैसे कह सकते है, मुझे बुलाया और बड़ी लम्बी डिस्कशन चली और फिर एक किताब दी " Safer Roads: Guide to Road Safety Engineering by K. W. Ogden" और बोले अच्छे से पढ़ना, शायद तुम्हारा सोचने का नजरिया बदल जाये | वह जिंदगी का पहला कदम था मेरा अपने इस कैरियर की तरफ | खुद प्रोफेसर मोहन 80 के दशक में अमेरिका में अपनी नौकरी छोड़ हिंदुस्तान वापस आये ताकि अपने देश को सड़क सुरक्षा के नाम पे कुछ दे सके, कर सके और इस सोच को बखूबी अंजाम दिया देश का पहला सड़क सुरक्षा का IIT दिल्ली में रिसर्च सेंटर बना के (TRIPP) | आते ही नए मोटर व्हीकल एक्ट 1988 को बनाने में जुट गए जोकि 1934 से चला आ रहा था | देश में सीट बेल्ट और हेलमेट की बात की| बाद में पता चला की दूरदर्शन पर जो एक हेलमेट पहनने वाला विज्ञापन आता है जिमे एक आदमी नारियल हथौड़ा से तोड़ता है और फिर उसी नारियल को हेलमेट के अंदर रख हथौड़ा मरता है और नारियल को कुछ नहीं होता, इतना इम्पैक्टफुल मास अवेयरनेस का प्रोग्राम भी प्रोफेसर मोहन द्वारा निर्देशित था | मेरे जैसे अनगिनत सड़क रेसर्चेर्स और प्रोफेशनल इस देश को दिए | गलत को सही तरीके से ग़लत कैसे कहते है वह प्रोफेसर मोहन ने सिखाया | अपने जो बुनियाद इस देश को दे आने वाली पीढ़ियां उसका फ़ायदा लेती रहेंगी | स्वर्ग तक आपका का सफ़र सुरक्षित रहे और आप सदैव जिंदा रहेंगे | Rest in Peace Sir 🙏

 

Sunday, May 3, 2020

*कितने वेंटीलेटर है हमारे पास फाजिल्का में*

COVID 19 की महामारी ने शायद दुनिया ही बदल दी हैं | इस महामारी के बाद शायद हमारी जिंदगी वैसे न रहे जैसे पहले थी | हम सब को यह महामारी  जिंदगी के साथ रिश्ते और दोस्ती के ताने बाने भी सिखा गयी, जो शायद हमसे से कई कहीं रख कर भूल गए थे | जिंदगी की क़ीमत समझा दी और साथ में वक्त भी दे दिया ताकि हम बची हुयी इस जिंदगी को इकठा कर सके और बचे हुए पलों को जी ले जी भर के | इन सब की शुरुआत आज से ही करनी होगी कयोंकि बेहतर जिंदगी तभी आएगा और रह पायेगी जब हम आज को सवारेंगे | चलिए आपसे इन्ही पलों को बेहतर बनाने के लिए एक छोटी सी सच्चाई से रु-बरु करवाता हूं |

हम सभी आजकल वेंटीलेटर की बात काफी कर रहे है, क्या आपको पता है की कुदरत ने ऐसे कई वेंटीलेटर हो हमें जिंदगी भर आक्सीजन देते है "पेड़" के रूप में हमें मुफ्त में दिए है | बात अगर में अपने शहर फाजिल्का की करूँ तो हमारे पास शहर में सिर्फ़ 4000 वेंटीलेटर यानी पेड़ है और आबादी 85000 से भी ज्यादा | फाज़िलका में क़रीब 21000 घर है और घरों के अनुपात में देखूं तो क़रीब हर 5 घरो के बाद एक घर को ही यह कुदरत वाला वेंटीलेटर मयस्सर हैं जो की बहुत कम है | पुरे देश की बात करूँ तो हर एक व्यक्ति के पीछे करीबन 28 पेड़ है और हमारे फाजिल्का में क़रीब 22 व्यक्तियों के पीछे सिर्फ एक पेड़ | आप सोचिये जब साफ़ हवा की ज़रूरत सब को है और आने वाली जिंदगी में और भी होगी तो हमें जिन्दा रखने वाला लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाला वैंटिलेटर यानी पेड़ तो हमारे पास होगा ही नहीं | क्या सच में हम इतने स्वार्थी, खुदगर्ज़ और अनपढ़ है की एक छोटी सी बात भी हमें समझ नहीं आ पा रही |  यह COVID क़ुदरत के नियमों से विपरीत चलने और न समझने का तरीका ही है और अब भी देर नहीं हुयी है | जून के बाद का वक्त उपयुक्त आने वाला है , बारिशो  पहले आओ सब मिल के यह ठान ले , एक परिवार एक पेड़ रूपी वेंटीलेटर लगाएगा भी और संभालेगा भी | फाजिल्का वालों हमें रुकना नहीं हैं, हमारा इतिहास गवाह है के फाजिल्का वाले जो ठान ले वह करके दिखाते हैं तो इस बार *"एक घर, एक पेड़"* के प्रण के साथ अपनी आने वाली खूबसूरत जिंदगी के नाम एक हरा भरा फाजिल्का जहाँ पे लोग आकर कहें *"वाह जिंदगी तो जिंदादिली फाजिल्का में फाजिल्का वालों के साथ ही रहती हैं"* | 

आइये मिलकर बनाते है इस खूबसूरत जिंदगी को और भी खूबसूरत 


जय हिन्द 
*आपका नवदीप*

Tuesday, April 21, 2020

#𝐅𝐚𝐳𝐢𝐥𝐤𝐚𝐍𝐨𝐬𝐭𝐚𝐥𝐠𝐢𝐚 || मैं और मेरा शहर

वी. सी. आर. का नया नया दौर था, फाजिल्का के संजीव और राजा सिनेमा में कोई भी नयी मूवी करीब 𝟐 या 𝟑 महीने बाद ही आती थी | कोशिश हर मूवी देखने की सिनेमा में ही होती थी क्योंकि वीडियो कैसेट में फिल्म छोटी होती थी और बार बार मशहुरियों को फॉरवर्ड करना पड़ता था | इसी लिए विश लिस्ट बना कर रखनी पड़ती थी |ऑनलाइन तो कुछ था ही नहीं और सब कुछ ऑफलाइन खुद ही बनाना पड़ता था | पंजाब केसरी में शुक्रवार के शुक्रवार नयी फिल्मो की सूची आती थी और उसी छोटे से पोस्ट को काट कर किसी पुराणी डायरी में चिपका लेते थे |आज वही एक पुराणी डायरी मिली जिसमे मैंने 𝟏𝟗𝟖𝟗 और 𝟏𝟗𝟗𝟎 की कुछ फिल्मों की लिस्ट लगा के रखी थी | फुर्सत के समय यही सब इस शहर से जुडी हुई यादें देखते रहते है और सोचते है की ऑफलाइन की छोटी सी दुनिया कितनी ख़ूबसूरत थी |  

Thursday, April 9, 2020

SOHNA - Markfed Punjab प्रोडक्ट्स की Fazilka Ecocabs टीम के साथ होम डिलीवरी - COVID19

#StayHome #StaySafe #FazilkaFightAginstCOVID #COVID19 #Markfed
दोस्तों मार्कफैड के साथ मिलकर फाजिल्का में आपकी सुविधा हेतु एक छोटा सा कदम | अब आपको घर बैठे ही SOHNA, Markfed Punjab की प्रोडक्ट्स फ्री होम डिलीवरी के जरिये घर पहुंचा दी जाएँगी | और कर्फ्यू को ध्यान में रखते हुए मार्कफैड ने अपनी साडी प्रोडक्ट्स पर 5% अलग से डिस्काउंट भी ऑफर किया है | डिलीवरी में हमारे रिक्शा ऑपरेटर्स (Ecocabs-India) सहायता कर रहे है, आपका शायद न केवल आपको गुणवत्ता वाला जरूरी राशन सस्ती दरों पर घर बैठे पहुँचाया जायेगा, पर शायद एक जरूरतमंद के लिए इस घड़ी में रोजगार भी |
आप अपना आर्डर दिए गए फ़ोन नंबरों पर लिखवा सकते है और हो सके तो आपके जानने वालो तक भी यह मैसेज पहुँचाये <3 <3 #ILoveFazilka  

Thursday, March 12, 2020

Edu dept to offer door-to-door bus service for primary schools

The pilot project is being launched in Fatehgarh Sahib, Sangrur, Fazilka, Mansa and Jalandhar districts.

Mar 11, 2020, 21:55 IST, Hindustan Times
Harmandeep Singh
Hindustan Times, Patiala

The state government will start door-to-door transportation facilities to ferry children from the next academic year. As part of the initiative, 68 government primary schools of five districts have been identified to start the pick-and-drop service.

The pilot project is being launched in Fatehgarh Sahib, Sangrur, Fazilka, Mansa and Jalandhar districts. The department has also floated tenders to hire the bus service operator. An education department official said, "We have identified 24 government primary schools of Sangrur district, one from Fazilka, five from Mansa, 18 from Jalandhar and 30 schools from Fatehgarh Sahib district."

Teachers' Unions, however, have criticised the move, claiming that it was part of the government's agenda to merge (amalgamation of) primary schools.

Davinder Singh Poonia, state president, Democratic Teachers Front (DTF), said, "The education department is moving towards the amalgamation of primary schools by offering the transportation service. The main motive of the government is to attract students from far-off places from their nearby schools to specific schools. By this method, the department wants to decrease the enrolment of some of its primary schools and then close these."

Manoj Kumar, deputy state project director has confirmed the development. "We have floated tenders to hire the bus service to ferry children. The tenders will be opened next week. There are schools in the state, where children face transportation troubles. This forces their parents to drop them to school." He added teachers' fears were unfounded. "Our only aim in providing the facility is to make sure there is no transportation problem for students. It is the students' wish on which school he/she wants to join."