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Friday, May 21, 2021

Tribute to Professor Dinesh Mohan and Sunder Lal Bahuguna by Ravish Kumar - Prime Time -NDTV

भारत के सड़क सुरक्षा की पितामह और सच्चे देशभगत प्रोफेसर दिनेश मोहन नहीं रहे | देश के लिए और हम सब के लिए यह एक न पूरा होने वाला नुकसान है शायद | उनसे सं 2003 में एक अचानक हुए वाकय से जुड़ा | रांची से पटना गाड़ी में सफर करते हुए प्रोफेसर मोहन का आउटलुक में एक आर्टिकल पढ़ा, यह सं 2003 की बात है, जिसमे उन्होंने कहा की देश में एक भी सड़क शायद ऐसे नहीं जो सड़क सुऱक्षा के मापदंडो पर पूरी उतरे, और जिस गति से देश सड़को का बिना सड़क सुरक्षा के मापदंडो से विकास होने जा रहा है ,सड़क हादसों में मौतों की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी | तब में IIT में M.Tech कर रहा था | ईमेल की, सर आप ऐसे कैसे कह सकते है, मुझे बुलाया और बड़ी लम्बी डिस्कशन चली और फिर एक किताब दी " Safer Roads: Guide to Road Safety Engineering by K. W. Ogden" और बोले अच्छे से पढ़ना, शायद तुम्हारा सोचने का नजरिया बदल जाये | वह जिंदगी का पहला कदम था मेरा अपने इस कैरियर की तरफ | खुद प्रोफेसर मोहन 80 के दशक में अमेरिका में अपनी नौकरी छोड़ हिंदुस्तान वापस आये ताकि अपने देश को सड़क सुरक्षा के नाम पे कुछ दे सके, कर सके और इस सोच को बखूबी अंजाम दिया देश का पहला सड़क सुरक्षा का IIT दिल्ली में रिसर्च सेंटर बना के (TRIPP) | आते ही नए मोटर व्हीकल एक्ट 1988 को बनाने में जुट गए जोकि 1934 से चला आ रहा था | देश में सीट बेल्ट और हेलमेट की बात की| बाद में पता चला की दूरदर्शन पर जो एक हेलमेट पहनने वाला विज्ञापन आता है जिमे एक आदमी नारियल हथौड़ा से तोड़ता है और फिर उसी नारियल को हेलमेट के अंदर रख हथौड़ा मरता है और नारियल को कुछ नहीं होता, इतना इम्पैक्टफुल मास अवेयरनेस का प्रोग्राम भी प्रोफेसर मोहन द्वारा निर्देशित था | मेरे जैसे अनगिनत सड़क रेसर्चेर्स और प्रोफेशनल इस देश को दिए | गलत को सही तरीके से ग़लत कैसे कहते है वह प्रोफेसर मोहन ने सिखाया | अपने जो बुनियाद इस देश को दे आने वाली पीढ़ियां उसका फ़ायदा लेती रहेंगी | स्वर्ग तक आपका का सफ़र सुरक्षित रहे और आप सदैव जिंदा रहेंगे | Rest in Peace Sir 🙏