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Tuesday, May 4, 2010
आखिरकार जारी करना पड़ा नोटिस
भास्कर न्यूज, 2nd May 2010
साइकिल बाजार में नगर कौंसिल की जगह पर एक दुकानदार द्वारा किए गए अवैध कब्जे को हटाने को लेकर चल रहे विवाद पर आखिरकार कौंसिल को कदम उठाना ही पड़ा। कौंसिल की ओर से शुक्रवार को दुकानकार को अवैध कब्जा छोडऩे का नोटिस जारी कर दिया गया। कौंसिल ने दुकानदार को चेतावनी दी है कि अगर छह घंटे में अवैध कब्जा नहीं छोड़ा गया तो कौंसिल अमला कब्जा हटा देंगे। उधर अवैध कब्जा हटाने को लेकर संघर्ष कर रही रिक्शा यूनियन ने कौंसिल की सराहना करते कहा है कि यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था।
क्या है मामला
करीब दो माह पूर्व जब उक्त जगह पर कौंसिल शौचालय का निर्माण करवा रही थी तो रिक्शा यूनियन व केवल कुमार ने शौचालय बनाने का विरोध किया था। कौंसिल ने दोनों के लिए ही उक्त जगह पर अलग अलग स्थान रखने का बीच का रास्ता निकाला था। उस समय शौचालय के बाहर रिक्शा खड़े करने व तथा एक कॉर्नर पर केवल कुमार की पकौड़ों की दुकान लगाने का निर्णय लिया
गया था। दुकानदार ने 19-20 मार्च की रात दुकान पर शटर लगाकर कब्जा जमा लिया। जिसका रिक्शा यूनियन ने जमकर विरोध किया। यूनियन सदस्यों का कहना था कि उक्त जगह पर वह रिक्शा खड़ी करते थे, जबकि शटर लग जाने से यहां पर रिक्शा खड़ी नहीं की जा सकती है। इस विरोध के बाद चौक पर पकौड़े लगाने वाले केवल कुमार को उक्त शटर को उखाडऩे को कहा गया। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसी के विरोध में रिक्शा यूनियन ने चौक पर कई बार धरना प्रदर्शन किया और शटर को उखाडऩे की मांग लगातार करते रहे।
दुकान पर चिपकाया नोटिस
नगर कौंसिल की ओर से जारी नोटिस को लेने पर जब दुकानदार ने इंकार कर दिया तो कौंसिल कर्मचारी की ओर से दुकान पर नोटिस चिपका दिया गया। कार्यकारी अधिकारी तिलक राज वर्मा ने बताया कि कौंसिल की ओर से दुकानदार केवल कुमार को अवैध कब्जा छोडऩे का नोटिस जारी कर दिया गया है, अगर दुकानदार ने छह घंटे में अवैध कब्जा नहीं छोड़ा तो कौंसिल की ओर से कब्जा हटा दिया जायेगा।
मंत्री से होगी शिकायत
रिक्शा यूनियन के सचिव अशोक कुमार ने बताया कि चंद सियासी नेताओं की शह पर दुकानदार ने अवैध कब्जा किया है, जिस कारण कई दिन तक दुकानदार के खिलाफ कार्रवाही नहीं की गई। उन्होंने कहा कि दुकानदार और उक्त सियासी नेताओं के बीच हुई बातचीत उनके पास मौजूद है, जिसका खुलासा सोमवार को जनता के सामने किया जायेगा। उधर ग्रेजूऐटस वैलफेयर एसोसिऐशन फाजिल्का के सचिव नवदीप असीजा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश से फाजिल्का ईको कैब की तर्ज पर पंजाब भर में शुरू किए जा रहे प्रोजेक्ट पर अगले सप्ताह स्थानीय निकाय मंत्री मनोरंजन कालीया के साथ बैठक है, जिसमें रिक्शा चालकों के सामने मुश्किलें पैदा कर रहे नेताओं की पोल खोली जाएगी।
http://www.bhaskar.com/2010/05/01/500427-927481.html
Monday, December 3, 2007
ऐतिहासिक धरोहर घंटाघर के दुश्मन बने दुकानदार
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/punjab/4_2_3955161.html
फाजिल्का -जहां एक तरफ फाजिल्का के बाशिंदों ने शहर के स्थापना दिवस पर यहां स्थित घंटाघर को रंगबिरंगी लाइटों से दुल्हन की तरह सजाकर व उसके परिसर में तीन दिन तक डीजे म्यूजिक का प्रबंध कर उसे शहर की शान होने की संज्ञा दी, वहीं अब जबकि स्थापना दिवस समारोह संपन्न हो चुका है, घंटाघर के आसपास के दुकानदार ही उसकी खूबसूरती को बिगाड़ने लगे है। दुकानदार फाजिल्का की इस ऐतिहासिक धरोहर के एक द्वार को कूड़ाघर बनाकर, दूसरे को अपने दोपहिया वाहनों का पार्किग स्थल बनाकर, तीसरे व चौथे पर अवैध अतिक्रमण करवाकर घंटाघर की खूबसूरती को बिगाड़ा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस ऐतिहासिक धरोहर की देखभाल करने की जिम्मेवार नगर परिषद ने तो पहले ही इसे अनदेखा कर रखा है, वहीं इसके आसपास के दुकानदारों ने भी इस धरोहर के प्रति अपनी जिम्मेवारी से मुंह फेर लिया लगता है। यही कारण है कि फाजिल्का महोत्सव में छाए रहे घंटाघर के इर्द गिर्द आज गंदगी का आलम है। घंटाघर का एक द्वार दुकानदारों के दोपहिया वाहन संभाल रहा है तो अन्य दो द्वारों पर छोले भटूरे व अन्य रेहड़ियां लगाने वालों ने अतिक्रमण कर लिया है।
जानकारी के अनुसार इस ऐतिहासिक धरोहर का स्वरूप बिगाड़ने का दुकानदारों द्वारा फेंका गया कूड़ा तो बनता ही है, साथ ही आसपास के अधिकांश दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के आगे नगर परिषद की जगह पर प्रतिदिन के हिसाब से किराया लेकर खड़े किए गए चाट, फ्रूट, गोलगप्पे व अन्य सामान की रेहड़ियों वाले भी घंटाघर परिसर को कूड़ा फेंककर गंदा करते है। हालांकि दुकानदारों द्वारा परिषद की जगह पर रेहड़ियां खड़ा करवाना व उनसे पैसे लेना अवैध है, लेकिन वह ऐसा करने के बावजूद हजारों रुपये महीना कमाने वाले दुकानदार सांझे तौर पर कुछेक सौ रुपया इकट्ठा कर घंटाघर की सफाई का प्रबंध नहीं कर रहे। बल्कि घंटाघर परिसर में या तो कूड़ा खुद फेंक रहे है या फेंकने वालों को मूक दर्शक बने देख रहे है।
फाजिल्का -जहां एक तरफ फाजिल्का के बाशिंदों ने शहर के स्थापना दिवस पर यहां स्थित घंटाघर को रंगबिरंगी लाइटों से दुल्हन की तरह सजाकर व उसके परिसर में तीन दिन तक डीजे म्यूजिक का प्रबंध कर उसे शहर की शान होने की संज्ञा दी, वहीं अब जबकि स्थापना दिवस समारोह संपन्न हो चुका है, घंटाघर के आसपास के दुकानदार ही उसकी खूबसूरती को बिगाड़ने लगे है। दुकानदार फाजिल्का की इस ऐतिहासिक धरोहर के एक द्वार को कूड़ाघर बनाकर, दूसरे को अपने दोपहिया वाहनों का पार्किग स्थल बनाकर, तीसरे व चौथे पर अवैध अतिक्रमण करवाकर घंटाघर की खूबसूरती को बिगाड़ा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस ऐतिहासिक धरोहर की देखभाल करने की जिम्मेवार नगर परिषद ने तो पहले ही इसे अनदेखा कर रखा है, वहीं इसके आसपास के दुकानदारों ने भी इस धरोहर के प्रति अपनी जिम्मेवारी से मुंह फेर लिया लगता है। यही कारण है कि फाजिल्का महोत्सव में छाए रहे घंटाघर के इर्द गिर्द आज गंदगी का आलम है। घंटाघर का एक द्वार दुकानदारों के दोपहिया वाहन संभाल रहा है तो अन्य दो द्वारों पर छोले भटूरे व अन्य रेहड़ियां लगाने वालों ने अतिक्रमण कर लिया है।
जानकारी के अनुसार इस ऐतिहासिक धरोहर का स्वरूप बिगाड़ने का दुकानदारों द्वारा फेंका गया कूड़ा तो बनता ही है, साथ ही आसपास के अधिकांश दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के आगे नगर परिषद की जगह पर प्रतिदिन के हिसाब से किराया लेकर खड़े किए गए चाट, फ्रूट, गोलगप्पे व अन्य सामान की रेहड़ियों वाले भी घंटाघर परिसर को कूड़ा फेंककर गंदा करते है। हालांकि दुकानदारों द्वारा परिषद की जगह पर रेहड़ियां खड़ा करवाना व उनसे पैसे लेना अवैध है, लेकिन वह ऐसा करने के बावजूद हजारों रुपये महीना कमाने वाले दुकानदार सांझे तौर पर कुछेक सौ रुपया इकट्ठा कर घंटाघर की सफाई का प्रबंध नहीं कर रहे। बल्कि घंटाघर परिसर में या तो कूड़ा खुद फेंक रहे है या फेंकने वालों को मूक दर्शक बने देख रहे है।
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